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Thu, 11 August 2022

दुष्यंत संग्रहालय में हुआ कीर्ति काले का कवितापाठ 'शब्दों के उजाले' में कीर्ति काले ने सुनाई श्रेष्ठ रचनाएँ

भोपाल। "दिन रैना नहीं चैना, भर भर आये नैना, मन में उठा है भूचाल रे, बिटिया चली है ससुराल" प्रख्यात गीतकार डॉ कीर्तियो काले के सुमधुर कंठ से ये गीत सुनते ही दुष्यंत संग्रहालय के सभागार में उपस्थति श्रोता भावुक हो उठे।...

भोपाल। "दिन रैना नहीं चैना, भर भर आये नैना, मन में उठा है भूचाल रे, बिटिया चली है ससुराल" प्रख्यात गीतकार डॉ कीर्तियो काले के सुमधुर कंठ से ये गीत सुनते ही दुष्यंत संग्रहालय के सभागार में उपस्थति श्रोता भावुक हो उठे। दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में देश की प्रसिद्द गीतकार डॉ कीर्ति काले आज 'शब्दों के उजाले' कार्यक्रम में एकल कवितापाठ के लिए आमंत्रित थीं।

डॉ कीर्ति काले ने मंचों की रचनाओं से हटाकर भी अपने अनेक श्रेष्ठ गीत सुनाये. उन्होंने श्रोताओं की फरमाइश पर भी रचनापाठ किया। डॉ कीर्ति काले ने कहा कि संग्रहालय के इस सभागार में प्रबुद्ध श्रोताओं के बीच रचनापाठ करना गौरव की बात है। उनके आग्रह पर ऋषि श्रृंगारी, मधु शुक्ल, सीमा शर्मा और डॉ क्षमा पाण्डेय ने भी अपनी रचनाये प्रस्तुत की।

आरम्भ में डॉ कीर्ति काले ने दुष्यंत संग्रहालय का भ्रमण किया और इसे एक उपलब्धि माना। डॉ कीर्ति काले दुनिया के अनेक देशों में मंच पर कवितापाठ के लिए आमंत्रित की जाती है। निदेशक राजुरकर राज ने संग्रहालय की परम्परा का उल्लेख करते हुए समारोह की परिकल्पना पर प्रकाश डाला। संग्रहालय के संरक्षक अशोक निर्मल ने स्वागत वक्तव्य दिया। वरिष्ठ गीतकार नरेंद्र दीपक ने आधार वक्तव्य देते हुए डॉ कीर्ति काले के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। कीर्ति काले ने उपस्थित श्रोताओं के सवालो के जवाब भी दिए। संग्रहालय संरक्षक रामबाबू शर्मा ने आभार व्यक्त किया। Posted By: SATISH TEWARE


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