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Fri, 01 July 2022

LNCT विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल पटेल बोले-जीवन की सार्थकता लोक कल्याण के भाव से जीने में

भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जीवन की सार्थकता लोक कल्याण के भाव से जीने में है। मानव को दूसरों के दुख-दर्द समझने और सहयोग करने की विशेष क्षमता मिली हैं। साथ ही संवाद करने की अद्भुत शक्ति और मदद...

भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जीवन की सार्थकता लोक कल्याण के भाव से जीने में है। मानव को दूसरों के दुख-दर्द समझने और सहयोग करने की विशेष क्षमता मिली हैं। साथ ही संवाद करने की अद्भुत शक्ति और मदद का हाथ बढ़ाने की क्षमता दी गई है। उन्होंने कहा कि समाज के शिक्षित वर्ग का यह दायित्व है कि वह समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों का सहयोग कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल कराए।

राज्यपाल एवं कुलाध्यक्ष पटेल एल.एन.सी.टी. विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वर्ण पदक, पी.एच.डी. प्राप्तकर्ताओं को पुरस्कृत किया। राज्यपाल ने सिने अभिनेता सुमन तलवार और समाज सेवी संजीव कुमार को मानद उपाधि से सम्मानित किया। समाज सेवी राज किशोर चौरसिया का अभिनंदन किया।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि सेवा और सहयोग के लिए साधनों की नहीं सोच की जरूरत होती है। वंचित वर्गों के बच्चों को स्कूल में पढ़ाए गए विषयों के अभ्यास में सहयोग कर उनकी शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। इसके लिए किसी साधन की नहीं दिनचर्या से मात्र एक घंटा समय निकालने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि किसी का सहयोग करने से जो आत्म-संतुष्टि मिलेगी, वह अतुलनीय और आनंददायी होगी। उन्होंने कहा कि कार्य को उत्तरदायित्व के साथ करना सफलता का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से दीक्षांत शपथ का पालन प्रतिदिन करने की अपेक्षा की। राज्यपाल पटेल ने कहा कि पीड़ित व्यक्तियों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, योग करने और आहार का ध्यान रखने पर बल देते हुए कहा कि जो रूचे वह नहीं, जो पचे वह आहार लेना चाहिए।

निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष भरत शरण सिंह ने कहा कि दीक्षा जीवन की शिक्षा का प्रारंभ है। वर्तमान युग विषय-विशेषज्ञता का है। इसलिए निरंतर ज्ञान की प्राप्ति आवश्यक है। महर्षि दधीचि ने मानवता के कल्याण के लिए अपना शरीर दान कर दिया था। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वह अपनी जड़ों को प्राप्त ज्ञान और प्रतिभा से सिंचित करते रहें। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जे.एन. चौकसे ने कहा कि अच्छा व्यक्ति बनने में जीवन की सार्थकता है। अच्छा व्यक्ति हर परिस्थिति में अच्छा और सफल होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वह पालकों, शिक्षकों का सदैव स्मरण करें। उनके प्रति सदैव आभारी रहें। अपनी अंतरात्मा की आवाज पर कार्य करें। सदैव सीखने और सुनने के लिए तत्पर रहें और स्वयं के प्रति सच्चे रहें। चांसलर प्रो. अनुपम चौकसे ने आभार व्यक्त किया। विद्यार्थियों को दीक्षांत उपदेश और शपथ कुलपति एन.के. थापक ने दिलाई। Posted By: SATISH TEWARE


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