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Fri, 07 October 2022

इंदौर,रतलाम,शहडोल की जेल में बंदियों को राखी बांधने की मांग को लेकर हंगामा और प्रदर्शन

इंदौर/ रतलाम/ शहडोल । रक्षाबंधन पर प्रदेश के इंदौर, रतलाम, शहडोल सहित कई जिलों की जेलों के बाहर  बहनों और परिजनों का हंगामा होने की खबर मिली है। इस को लेकर जिला जेल (सर्किल जेल) के अंदर बैठाकर भाइयों को बहनों से राखी...

इंदौर/ रतलाम/ शहडोल । रक्षाबंधन पर प्रदेश के इंदौर, रतलाम, शहडोल सहित कई जिलों की जेलों के बाहर  बहनों और परिजनों का हंगामा होने की खबर मिली है। इस को लेकर जिला जेल (सर्किल जेल) के अंदर बैठाकर भाइयों को बहनों से राखी नहीं बंधवाने से लोगों व हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं में रोष फैल गया। उन्होंने व्यवस्था करने की मांग को लेकर जेल परिसर में जमकर नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं जेल के बाहर मुख्य रोड पर चक्काजाम कर दिया गया और लोग धरने पर बैठ गए। इससे हंगामे की स्थिति बन गई। उनकी मांग है कि जेल में निरुद्ध बंदियों को उनकी बहनों के हाथों से ही राखी बंधवाई जाए।

इस संबंध में जेल अधीक्षकों का कहना है कि अभी तक इस तरह के कोई निर्देश नहीं है कि रक्षाबंधन पर बहनों को उनके भाइयों से मिलने दिया जाए इसलिए आज इनको मिलने की इजाजत नहीं दी गई है उनका कहना था कि गेट पर आरक्षक को खड़ा कर दिया गया है ताकि जो बहनें मिठाई राखी लेकर आती हैं वह उनके भाई व तक पहुंचा दी जाए। जेल अधिकारियों का कहना है कि गृह विभाग से मिले निर्देशों के अनुसार टेलीफोन से कांफ्रेंस करवाकर उनकी लाई हुई राखी, मिठाई बंदी तक पहुंचाने का सिस्टम लागू किया गया है।

इंदौर में सेंट्रल जेल के बाहर हंगामा, चक्काजाम। रक्षाबंधन पर जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनों की भीड़। राखी पर मिलने नहीं दे रहे हैं पुलिसकर्मी। शासकीय अवकाश का हवाला दे रहे अधिकारी। सेंट्रल जेल में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची हैं। गुस्साए स्वजनों ने बाद में डीआरपी लाइन चौराहे पर चक्काजाम किया। इन्हें पुलिसकर्मियों ने समझा-बूझाकर हटाने का प्रयास किया, लेकिन वह राजी नहीं थे।

शहडोल में जेल के निर्देशों के मुताबिक इनको अपने कैदी भाइयों से मिलने की इजाजत नहीं दी गई। गौरतलब है कि कोरोना काल में के पहले जिला जेल में रक्षाबंधन के त्यौहार पर आने वाली बहनों को उनके भाइयों से मिलकर राखी बांधने की अनुमति मिल जाती थी लेकिन कोरोना संकट काल के शुरू होते ही इस मुलाकात को बंद कर दिया गया। यह सिलसिला अभी भी जारी है।

जेल के बाहर बहन और परिजनों द्वारा लाई गई मिठाई राखी नारियल लेकर व्यवस्थित तरीके से संबंधित बंदी तक पहुंचाया जा रहा है, इसके साथ ही बंधुओं की उनसे मिलने आए संयोजन से मुलाकात भी टेलीफोन से कराई जा रही है। पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। उधर, संगठन के कार्यकर्ता इस बात पर अड़े हुए है कि बहनों को अंदर बंदियों के पास बैठाकर राखी बंधवाई जाए। यह व्यवस्था नहीं होने से नाराज लोगो व कार्यकर्ताओं ने जेल के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

वहीं जेल के सामने की रोड पर जाम लगा दिया गया। इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और लोग परेशान होते रहे। हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस बात पर अड़े रहे कि बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर खुद ही राखी बांधने दी जाए। जेल प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं हुआ और सुबह से टेलीफोन कांफ्रेंस के जरिये बंदियों से उनकी बहनों की मुलाकात करवाना शुरू किया था, जो दोपहर तक जारी है।

जेल के उच्च अधिकारियों के निर्देश हैं कि अभी कैदियों से मिलने की इजाजत नहीं है। रक्षाबंधन के त्यौहार पर जो बहनें राखी लेकर अपने भाइयों से मिलने पहुंची थी उनको जिला जेल के गेट पर ही आरक्षक ने समझा-बुझाकर वापस कर दिया। हालांकि, बहनें राखी मिठाई कपड़े जो भी लेकर आई थीं, वह उनके भाइयों तक पहुंचाने की व्यवस्था जेल अधीक्षक ने की थी।  Posted By: SATISH TEWARE


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